हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप, नर्सिंग भर्ती पर हल्लाबोल—जेएनएम मेडिकल कॉलेज में यूनियन का प्रदर्शन-घेराव।
हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप, नर्सिंग भर्ती पर हल्लाबोल—जेएनएम मेडिकल कॉलेज में यूनियन का प्रदर्शन-घेराव।
हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप, नर्सिंग भर्ती पर हल्लाबोल—जेएनएम मेडिकल कॉलेज में यूनियन का प्रदर्शन-घेराव।

नवीन नर्सिंग कॉलेजों की नियमित भर्ती को लेकर जेएनएम मेडिकल कॉलेज में यूनियन द्वारा किया गया प्रदर्शन, घेराव
रायपुर। संगठन अध्यक्ष द्वारा बताया गया कि सर्वप्रथम प्राप्त 2000 आवेदकों के आधार पर प्रवीण सूची जारी की गई है। फिर पात्र अपात्र सूची दावा आपत्ति लिस्ट के बाद सौंपी इंटरियर लिस्ट मेरिट के आधार पर जारी कर दिया गया। लेकिन मेरिट लिस्ट को ओपन नहीं किया गया। जिससे अभ्यर्थियों ने भर्ती में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने शासकीय नर्सिंग कॉलेज में डेमोंस्ट्रेटर एवं सहायक प्राध्यापक के पदों पर नियमित भर्ती से जुड़े मामले पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव अमित कटारिया आईएएस को अवमानना याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। आरोप है कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा 9 मार्च 2023 को दिए गए फैसले का तीन वर्ष बाद भी विधि सम्मत पालन नहीं किया गया। यह अवमानना याचिका अभय किशोरसिंह डॉ. अजय त्रिपाठी एवं अन्य की ओर से अधिवक्ता नेल्सन पन्ना, आयुतोष मिश्रा एवं रूपेश साहू ने प्रस्तुत की।
100 प्रतिशत आरक्षण को हाईकोर्ट ने किया था असंवैधानिक घोषित। मामला वर्ष 2021 भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। कर्ताओं ने हाई कोर्ट क्रमांक एस सी 7187/2021 एवं संबंधित याचिकाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ मेडिकल एजुकेशन राजपत्रित सेवा भर्ती नियम 2013 के अनुसूची 3 के नोट 2 तथा 8 दिसंबर 2021 के भर्ती विज्ञप्ति के क्लॉज 5 को चुनौती दी गई थी। 9 मार्च 2023 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इन प्रावधानों को असंवैधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया था। न्यायालय ने कहा था कि शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में डेमोंस्ट्रेटर एवं सहायक प्राध्यापक सीधी भर्ती में 100 प्रतिशत महिला आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 16 एवं 18 के अनुरूप नहीं है।
कर्ताओं ने हाईकोर्ट के संशोधित अधियाचन भेजने का किया था अनुरोध। अवमानना याचिका में कहा गया कि फैसलों के कुछ ही दिन बाद 15 मार्च 2023 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर हाईकोर्ट के निर्णय की जानकारी दी गई थी। आयोग ने विभाग को निर्णय के अनुरूप संशोधित अधियाचन भेजने का अनुरोध किया था ताकि नियमित भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
याचिका करता अभय किशोरसिंह का आरोप है कि विभाग ने न तो भर्ती नियमों में संशोधन किया और न ही संशोधित अधियाचन आयोग को भेजा। इसके चलते नियमित भर्ती प्रक्रिया आगे न बढ़ सकी।
नियमित भर्ती में संविदा भर्ती का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट के फैसले के अनुपालन के बजाय चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 22 जून 2026 को संविदा भर्ती का नया विज्ञापन जारी कर दिया। इस विज्ञापन को भी त्रिपाठी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
याचिका के सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से 15 मार्च 2023 के सीजीपीएससी पत्र का उल्लेख किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि विभाग को हाईकोर्ट के निर्णय की पूरी जानकारी थी। सचिव अमित कटारिया को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। अब सचिव की ओर से जवाब दाखिल होने के बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।