17 जुलाई के आदेश के बाद भी नहीं बदली व्यवस्था! उचित मूल्य दुकान क्रमांक 1015 पर कार्रवाई अधर में, राशन को तरस रहे हितग्राही।
17 जुलाई के आदेश के बाद भी नहीं बदली व्यवस्था! उचित मूल्य दुकान क्रमांक 1015 पर कार्रवाई अधर में, राशन को तरस रहे हितग्राही।

17 जुलाई के आदेश के बाद भी नहीं बदली व्यवस्था! उचित मूल्य दुकान क्रमांक 1015 पर कार्रवाई अधर में, राशन को तरस रहे हितग्राही।
वर्षों से मनमानी और अनियमितताओं के आरोपों के बीच एसडीएम ने दिए कार्रवाई के निर्देश, लेकिन सरकारी आदेश का पालन अब तक नहीं। राशन के इंतजार में रोज दुकान के बाहर बैठ रहे उपभोक्ता।
चिरमिरी (एमसीबी)। चिरमिरी स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान क्रमांक 1015 एक बार फिर सुर्खियों में है। पिछले कई वर्षों से इस दुकान के संचालन को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। वर्ष 2024 से ही हितग्राहियों द्वारा दुकान संचालक नीता पर मनमानी, राशन वितरण में अनियमितता और उपभोक्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार जैसे गंभीर आरोप लगाए जाते रहे हैं। इन शिकायतों के बावजूद लंबे समय तक स्थिति जस की तस बनी रही, जिससे गरीब और जरूरतमंद हितग्राहियों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ा।
हितग्राहियों का आरोप है कि दुकान संचालक अक्सर उन्हें धमकी भरे लहजे में कहती थीं कि “जिस अधिकारी के पास शिकायत करनी है कर दो, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।” इसके अलावा कई लोगों ने आरोप लगाया कि राशन लेने आने वाले हितग्राहियों को पैसों का लालच देकर उनका राशन अपने पक्ष में ले लिया जाता था। वहीं जो लोग इसका विरोध करते थे या अपना पूरा राशन लेने की मांग करते थे, उन्हें सुबह से शाम तक लंबी कतार में खड़ा रखकर परेशान किया जाता था।
आरोप यह भी रहे कि दुकान का संचालन निर्धारित समय के अनुसार नहीं किया जाता था। कभी दुकान देर से खुलती, तो कभी बिना पूर्व सूचना के बंद रखतीं।
इस से दूर-दराज़ से आने वाले हितग्राहियों को बार-बार खाली हाथ लौटना पड़ता था।
लगातार मिल रही शिकायतों और हितग्राहियों की परेशानियों को देखते हुए चिरमिरी एसडीएम ने आखिरकार 17 जुलाई 2026 को कार्रवाई के आदेश जारी किए। प्रशासन की ओर से उचित मूल्य दुकान के संचालन को लेकर आवश्यक कार्रवाई और व्यवस्था परिवर्तन के निर्देश दिए गए। लेकिन आदेश जारी होने के कई दिन बाद भी धरातल पर उसका प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा है।

बताया जा रहा है कि फूड इंस्पेक्टर 17 जुलाई से आदेश लेकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने में लगे हैं, लेकिन अब तक सरकारी आदेश का पूर्ण पालन नहीं हो सका है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब प्रशासनिक आदेश जारी हो चुका है, तो उसके क्रियान्वयन में आखिर देरी क्यों हो रही है?
इधर, अधिकांश हितग्राहियों को यह जानकारी तक नहीं है
कि एसडीएम द्वारा इस दुकान के संबंध में कार्रवाई के आदेश जारी किए जा चुके हैं।
वे रोज सुबह दुकान के बाहर इस उम्मीद में बैठ जाते हैं कि शायद आज दुकान खुले और उन्हें सरकार की ओर से मिलने वाला राशन मिल जाए।
लेकिन कई बार दुकान नहीं खुलने से उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय तक शिकायतों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण लोगों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर पड़ गया था।
अधिकांश हितग्राहियों ने यह मान लिया था कि चाहे कितनी भी शिकायत कर ली जाए, उनकी सुनवाई नहीं होगी और दुकान संचालक अपनी मनमानी करती रहेंगी।
अब सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि प्रशासनिक आदेश का शीघ्र पालन नहीं हुआ और वैकल्पिक व्यवस्था समय पर नहीं बनाई गई, तो इस माह हितग्राही सरकारी राशन से वंचित हो सकते हैं।
गरीब परिवारों के सामने खाद्यान्न संकट की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल…
सरकारी आदेश जारी होने के बावजूद उसका पालन आखिर कब होगा?
क्या जिम्मेदार अधिकारी समय रहते हितग्राहियों को राशन उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे, या फिर इस माह भी गरीब उपभोक्ताओं को राशन के लिए भटकना पड़ेगा?
या जो विकलांग है उन्हें बिना राशन के ही रहना पड़ेगा?