गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का SECL कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन, श्रमिकों और नगर समस्याओं को लेकर उठाई आवाज।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का SECL कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन, श्रमिकों और नगर समस्याओं को लेकर उठाई आवाज।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का SECL कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन, श्रमिकों और नगर समस्याओं को लेकर उठाई आवाज।
समाचार चिरमिरी। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी द्वारा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत 18 जून 2026 को SECL चिरमिरी कार्यालय एवं नगर पालिक निगम के खिलाफ जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में पाली-तानाखार विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम, राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम, प्रदेश अध्यक्ष संजय कमरों, जिला अध्यक्ष केबल सिंह सहित संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
धरना प्रदर्शन के दौरान संगठन ने मुख्य रूप से SECL में कार्यरत ठेका श्रमिकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। संगठन का कहना है कि भारत सरकार के कोयला मंत्रालय द्वारा वर्ष 2024 से श्रमिकों के लिए चार श्रेणियों में वेतनमान निर्धारित किया गया है, जिसमें अकुशल श्रमिकों के लिए ₹1242, अर्धकुशल के लिए ₹1274, कुशल के लिए ₹1305 तथा उच्च कुशल श्रमिकों के लिए ₹1334 प्रतिदिन का प्रावधान है। इसके साथ हर वर्ष 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने का भी नियम तय किया गया है। लेकिन जमीनी स्तर पर चिरमिरी क्षेत्र में ठेका श्रमिकों को मात्र ₹350 से ₹450 तक की मजदूरी दी जा रही है, जो शासन के निर्देशों के विपरीत है।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि श्रमिकों से 8 घंटे के बजाय 10 से 12 घंटे तक काम लिया जा रहा है, जबकि उन्हें न तो उचित स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं और न ही उनके परिवारों को क्षेत्रीय अस्पताल में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। खाली पड़े सरकारी आवासों पर अवैध कब्जों का मुद्दा भी उठाया गया। पार्टी नेताओं ने कहा कि ठेका श्रमिक झोपड़ियों और कच्चे मकानों में जीवन यापन करने को मजबूर हैं, जबकि उन्हें मूलभूत सुविधाएं जैसे बिजली और पानी तक नहीं मिल पा रही हैं।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने मांग की कि सभी ठेका श्रमिकों के लिए कम से कम ₹20 लाख का दुर्घटना बीमा और सेवा निवृत्ति के बाद ₹30 लाख की एकमुश्त सहायता राशि सुनिश्चित की जाए। संगठन का कहना है कि चिरमिरी क्षेत्र में 2000 से अधिक ठेका श्रमिक कार्यरत हैं और देश के कोयला उत्पादन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन उनकी स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है।
धरना के दौरान खदानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। नेताओं ने कहा कि पूर्व में NCPH खदान में दो बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें श्रमिकों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नहीं दिख रहा। बंद हो चुकी खुली खदानों के समतलीकरण की मांग भी रखी गई, ताकि भविष्य में भू-धंसाव या विस्थापन जैसी समस्याओं से शहर को बचाया जा सके।
कोयला परिवहन में लगे वाहनों द्वारा ओवरलोडिंग और बिना ढंके कोयला परिवहन को भी गंभीर खतरा बताते हुए संगठन ने इस पर तत्काल नियंत्रण की मांग की। इसके साथ ही नगर की सड़क, बिजली, पानी और सफाई जैसी बुनियादी समस्याओं को लेकर भी नगर निगम प्रशासन को घेरा गया।
नगर पालिक निगम के अंतर्गत कार्यरत मजदूरों को पिछले चार माह से वेतन नहीं मिलने का मुद्दा भी प्रदर्शन में प्रमुखता से उठाया गया। स्ट्रीट लाइट, पेयजल, सफाई व्यवस्था की बदहाली और निगम के एक अधिकारी द्वारा चिरमिरी की पहचान पर की गई कथित टिप्पणी का भी विरोध जताया गया। संगठन ने स्पष्ट किया कि शहर और यहां के नागरिकों के सम्मान पर सवाल उठाने वाले अधिकारियों का लगातार विरोध किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में SECL के अध्यक्ष-सह-प्रबंधक के नाम 16 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा गया, वहीं तहसीलदार के माध्यम से नगर पालिक निगम को 13 सूत्रीय ज्ञापन दिया गया। विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम ने प्रशासन को 15 दिन का समय देते हुए चेतावनी दी कि यदि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।
राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम ने कहा कि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी संघर्ष और आंदोलन की पार्टी है, और यदि जरूरत पड़ी तो क्षेत्र से कोयले का परिवहन भी रोका जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि चिरमिरी और आसपास का पूरा इलाका पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में आता है, जहां स्थानीय अधिकारों और कानूनों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रदेश प्रचार मंत्री शशि राज सिंह, नगर प्रभारी सुक्खू राम ध्रुव, नगर अध्यक्ष शाकिर अली, महासचिव नंद कुमार आयाम, जिला आईटी सेल प्रभारी चिंटू जैन, महामंत्री भीम कुमार, मो. हुसैन, वरिष्ठ कार्यकर्ता भूपत यादव, करन इनायती, सत्ते लाल सोनी सहित अनेक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका रही।
राकेश सिंह की रिपोर्ट